नई दिल्ली. केंद्र की मोदी सरकार की कैबिनेट मीटिंग में बुधवार को कैशलेस सिस्टम को लेकर एक बड़ा फैसला किया गया। कैबिनेट ने उस अध्यादेश पर मोहर लगा दी, जिसमें किसी भी कर्मचारी को सैलरी चेक या ई-पेमेंट के जरिए देने की बात कही गई है। कैबिनेट ने उस अध्यादेश पर मुहर लगा दी है जिसके तहत अब सैलरी चेक में देनी होगी या सीधे अकाउंट में ट्रांसफर करना होगा। अध्यादेश पर कैबिनेट की मुहर के बाद अब कर्मचारियों को कैश में सैलरी देने पर पाबंदी लग गई है।
कारोबारियों द्वारा पारिश्रमिक का भुगतान इलेक्ट्रानिक तरीके और चेक से करने के लिए मंत्रिमंडल ने अध्यादेश को मंजूरी दी। नियोक्ताओं के पास मजदूरी का भुगतान नकद में करने का भी विकल्प होगा। अध्यादेश छह महीने के लिये ही वैध होता है। सरकार को इस अवधि में इसे संसद में पारित कराना होता है।
बता दें कि, वेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक 2016 में मूल कानून की धारा छह में संशोधन का प्रस्ताव करता है ताकि नियोक्ता अपने कर्मचारियों को चैक या इलेक्ट्रानिक रूप से सीधे उसके बैंक खातों में भेज सके। श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने इससे संबंधित विधेयक लोकसभा में पेश किया था। विधेयक में कहा गया है कि नई प्रक्रिया से डिजिटल और कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था का मकसद पूरा होगा।
बुधवार, 21 दिसंबर 2016
मोदी सरकार का बड़ा फैसला, कैश में नहीं मिलेगी सैलरी, चेक या ई-पेमेंट से होगा भुगतान
पढ़ाई का विषय हमेशा साइंस रहा। बी एससी इलेट्रॉनिक्स से करने के बाद अचानक पत्रकारिता की तरफ रूझान बढ़ा। नतीजतन आज मेरा व्यवसाय और शौक
दोनों यही बन गए।
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