मुकुल रोहतगी के अनुसार, माफीनामे के ड्राफ्ट हलफनामा की भाषाशैली में अंतर है जबकि पिछली सुनवाई के दौरान उन्होंने बिना शर्त माफ़ी मांगने की बात कही थी, लेकिन दाखिल ड्राफ्ट हलफनामे में बिना शर्त माफी मांगने की बात में अंतर है। इसके बाद जज ने आजम खान के वकील कपिल सिब्बल से पूछा कि माफीनामा में किंतु और परन्तु जैसे शब्द प्रयोग क्यों किए गए हैं। जबकि माफीनामा सिर्फ माफ़ी होता है।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि रेप जैसे अपराधों पर नेताओं का गैर-जिम्मेदाराना तरीके से बयानबाजी करना ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 7 दिसंबर को आजम के माफीनामे पर विचार किया जाएगा।
बताते चलें कि, पीड़िता के पिता ने आजम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। गौरतलब है कि कैबिनेट मंत्री आजम खान ने बुलंदशहर गैंगरेप की घटना राजनीतिक साजिश करार दिया था। वहीं, उन्होंने कहा था कि यूपी में सत्ता पाने के लिए बेचैन विपक्षी दल सरकार को बदनाम करने के लिए किसी हद तक गिर सकते हैं।
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