शादी के मौके पर घोड़ी की मांग बढ़ जाती है क्योंकि दुल्हे राजा को घोड़ी चढ़कर ही शादी के मंडप तक पहुंचना होता है। घोड़ी चढ़ने की रस्म को पूरा किए बिना शादी के सात फेरे पूरे नहीं हो सकते क्योंकि इसके बिना दुल्हे को शादी के लायक ही नहीं माना जाता। यानी घोड़ी चढ़ना सिर्फ एक रस्म ही नहीं बल्कि विवाह के बाद की उन खास चीजों को परखने का तरीका भी है जिससे वैवाहिक जीवन की गाड़ी को आगे बढ़ाया जा सकता है।
1 बहुत से लोग सोचते हैं कि घोड़ी चढ़ना किसी धार्मिक कारण से जरूरी है तो ऐसा नहीं है। इसके पीछे कोई धार्मिक कारण नहीं है। यह दुल्हे की सेहत जरूरी कई बातों को परखने का एक माध्यम है। इससे यह जाना जाता है कि दुल्हा वास्तव में शादी के लायक है।
2 घोड़ी की सवारी से दुल्हे की उस क्षमता को भी जाना जाता है कि दुल्हा विवाह के बाद अपने वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभा सकता है।
3 घोड़ी चढ़ने के पीछे एक मान्यता यह है कि घोड़ी एक चतुर और फुर्तीला प्राणी होती है। इसकी सवारी स्वस्थ व्यक्ति ही कर सकता है। घोड़ी की लगाम को थामे रहना यह दर्शाता है दुल्हा परिवार की डोर को संभाले रख सकता है।
4 घोड़ी चढ़ने के पीछे यह भी माना जाता है कि दुल्हा पत्नी के चंचल मन को अपने प्रेम और संयम से काबू में रखने में सफल रहेगा।
5 जबकि एक मान्यता के अनुसार यह दुल्हे की साहस को दर्शाता है जो पत्नी की सुरक्षा करने की जिम्मेदारी को निभाने की क्षमता को व्यक्त करता है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें